Tuesday, July 16

Tag: Betrayal at the Battle of Khanwa and its impact

युद्ध में हार, पर हौसलों की जीत: Maharana Sanga की कहानी
नेशनल

युद्ध में हार, पर हौसलों की जीत: Maharana Sanga की कहानी

वीरता और त्याग की मूर्ति: Maharana Sanga मेवाड़ की धरती वीरता की गाथाओं से सराबोर है और इस वीर भूमि पर Maharana Sanga का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। 1509 से 1528 तक मेवाड़ के शासक रहे राणा सांगा एक महान योद्धा, कुशल शासक और भारत को विदेशी आक्रमणों से बचाने का सपना देखने वाले सपूत थे। रणभूमि के धाकड़ योद्धा राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्राम सिंह था। बचपन से ही इनमें अदम्य साहस और युद्ध कौशल कूट-कूट कर भरा था। युद्ध कला में निपुण राणा सांगा ने अपने शत्रुओं को همेशा (हमेशा - hamesha - always) हैरान किया। उनके शरीर पर 80 से भी अधिक युद्ध के घाव शौर्य का प्रमाण थे। कहा जाता है कि युद्ध में एक बार उनके एक हाथ और एक पैर कट गए थे, लेकिन राणा सांगा ने हार नहीं मानी और घायल अवस्था में भी युद्ध करते रहे। उनकी वीरता का ऐसा डंका था कि विदेशी आक्रमणकारी मेवाड़ पर हमला करने से पहले सौ ब...