Sunday, May 19

युद्ध में हार, पर हौसलों की जीत: Maharana Sanga की कहानी

वीरता और त्याग की मूर्ति: Maharana Sanga

मेवाड़ की धरती वीरता की गाथाओं से सराबोर है और इस वीर भूमि पर Maharana Sanga का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। 1509 से 1528 तक मेवाड़ के शासक रहे राणा सांगा एक महान योद्धा, कुशल शासक और भारत को विदेशी आक्रमणों से बचाने का सपना देखने वाले सपूत थे।

रणभूमि के धाकड़ योद्धा

राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्राम सिंह था। बचपन से ही इनमें अदम्य साहस और युद्ध कौशल कूट-कूट कर भरा था। युद्ध कला में निपुण राणा सांगा ने अपने शत्रुओं को همेशा (हमेशा – hamesha – always) हैरान किया। उनके शरीर पर 80 से भी अधिक युद्ध के घाव शौर्य का प्रमाण थे। कहा जाता है कि युद्ध में एक बार उनके एक हाथ और एक पैर कट गए थे, लेकिन राणा सांगा ने हार नहीं मानी और घायल अवस्था में भी युद्ध करते रहे। उनकी वीरता का ऐसा डंका था कि विदेशी आक्रमणकारी मेवाड़ पर हमला करने से पहले सौ बार सोचते थे।

राजपूतों को एकजुट करने का प्रयास

राणा सांगा की सबसे बड़ी ख़ासियत यह थी कि उन्होंने भारत को विदेशी ताकतों से बचाने के लिए सभी राजपूत राज्यों को एकजुट करने का प्रयास किया। उस समय भारत में मुगलों का आगमन हो चुका था और बाबर अपनी सत्ता को मजबूत कर रहा था। राणा सांगा ने इस खतरे को भांपते हुए अन्य राजपूत राजाओं को मुगलों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया।

खानवा का युद्ध – विजय से एक कदम दूर

1527 में राणा साँगा और बाबर के बीच खानवा के युद्ध में दोनों सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ। राणा सांगा ने अदम्य साहस के साथ बाबर की सेना का मुकाबला किया। युद्ध के दौरान एक समय ऐसा लगा कि राणा सांगा विजय प्राप्त कर लेंगे। लेकिन कुछ राजपूत सरदारों के विश्वासघात के कारण राणा सांगा को युद्ध में हार का सामना करना पड़ा।

विवादित मृत्यु Maharana Sanga

  • खानवा के युद्ध के बाद राणा सांगा चित्तौड़ नहीं लौटे और उन्होंने मृत्यु तक युद्ध जारी रखने की प्रतिज्ञा ली।
  • इतिहासकारों में राणा सांगा की मृत्यु को लेकर मतभेद है।
  • कुछ इतिहासकारों का मानना है कि युद्ध के बाद उन्हें जहर दे दिया गया था,
  • जबकि कुछ का कहना है कि युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनका निधन हुआ।

अमर वीरता का प्रतीक

  • चाहे राणा सांगा की मृत्यु किसी भी कारण हुई हो,
  • लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे
  • भारत के इतिहास में एक अमर वीर के रूप में याद किए जाते हैं।
  • उन्होंने अपने जीवनकाल में वीरता और त्याग की जो मिसाल पेश की,
  • वह सदियों तक भारतवासियों को प्रेरित करती रहेगी।
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