समय रहते कर लें उपाय तो रुक सकते हैं धान में लगने वाले रोग – समाचार पत्रिका

समाचार पत्रिका

Latest Online Breaking News

समय रहते कर लें उपाय तो रुक सकते हैं धान में लगने वाले रोग

😊 Please Share This News 😊

रिपोर्ट: आर०ए० पांडेय

समाचार पत्रिका, ब्यूरो

शोध छात्र कुलदीप सिंह ने बताया धान में लगने वाले रोगों पर नियंत्रण का उपाय

चौरीचौरा (गोरखपुर) प्रत्येक वर्ष धान की फसल में लगने वाले रोगों से किसान परेशान होते हैं। धान की महंगी खेती पर लाने वाले रोग किसानों की पूंजी डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ते। धान में लगने वाले कौन कौन से रोग हैं और उसको कैसे रोका जा सकता है। आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय, के शस्य विज्ञान के शोध छात्र कुलदीप सिंह ने रोगों के नाम, उनकी पहचान और उन पर कैसे नियंत्रण करें उसके बारे में बताया।

ऐसे होगी धान की अच्छी पैदावार : कुलदीप सिंह

कुलदीप सिंह ने बताया कि धान में लगने वाले रोगों पर समय पर नियंत्रण नहीं करने से धान की फसल को काफी नुकसान पहुँचता है। अगर हम धान की खेती में इन रोगों का समय पर पहचान करके नियंत्रित कर लें तो धान की अच्छी पैदावार ले सकते हैं। उन्होंने रोगों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि धान में लगने वाला सफेदा रोग लौह तत्व की कमी के कारण नर्सरी में ज्यादा लगता है। नई पत्ती कागज के समान सफेद निकलती है। खैरा रोग जिंक की कमी के कारण होता है। इस रोग में पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं, जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं। शीथ ब्लाइट रोग में पत्र कंचुल (शीथ) पर अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं, जिसका किनारा गहरा भूरा तथा मध्य भाग हल्के रंग का होता है। झोंका रोग  में पत्तियों पर आंख की आकृति के धब्बे बनते हैं, जो मध्य में राख के रंग के तथा किनारे गहरे कत्थई रंग के होते हैं। पत्तियों के अतिरिक्त बालियों, डण्ठलों, पुष्प शाखाओं एवं गांठों पर काले भूरे धब्बे बनते हैं। जीवाणु धारी रोग में पत्तियों पर नसों के बीच कत्थई रंग की लम्बी-लम्बी धारियॉ बन जाती हैं। मिथ्या कण्डुआ रोग में बालियों के कुछ दाने पीले रंग के पाउडर में बदल जाते हैं, जो बाद में काले हो जाते हैं।

धान को रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार जरूरी :

इन रोगों पर नियंत्रण के बारे में जानकारी देते हुए कुलदीप सिंह ने बताया कि किसान भाईयों को बीमारी को पहचान कर दवाई का प्रयोग करना चाहिए। धान को रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार जरूरी है। जीवाणु झुलसा एवं जीवाणु धारी रोग के नियंत्रण हेतु स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 4.0 ग्राम मात्रा को प्रति 25 किग्रा० बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करना चाहिये। झोंका रोग के नियंत्रण हेतु थीरम 75 प्रतिशत डब्लू०एस० की 2.50 ग्राम मात्रा अथवा कार्बेण्डाजिन 50 प्रतिशत डब्लू०पी० की 2.0 ग्राम मात्रा को प्रति किग्रा० बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करना चाहिए। शीथ ब्लाइट रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेण्डाजिन 50 प्रतिशत डब्लू०पी० की 2.0 ग्राम मात्रा को प्रति किग्रा० बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करना चाहिए। भूरा धब्बा रोग के नियंत्रण हेतु थीरम 75 प्रतिशत डब्लू०एस० की 2.50 ग्राम मात्रा अथवा ट्राइकोडरमा की 4.0 ग्राम मात्रा को प्रति किग्रा० बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करना चाहिए। मिथ्य कण्डुआ रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू०पी० की 2.0 ग्राम मात्रा को प्रति किग्रा० बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करना चाहिए। खैरा रोग के नियंत्रण हेतु जिंक सल्फेट 20-25 किग्रा० प्रति हे० की दर से बुवाई/रोपाई से पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से खैरा रोग का प्रकोप नहीं होता है।

जीवाणु झुलसा/जीवाणुधारी रोग के नियंत्रण हेतु :

बायोपेस्टीसाइड (जैव कवक नाशी) स्यूडोमोनास फ्लोरसेन्स 0.5 प्रतिशत डब्लू०पी० की 2.50 किग्रा० प्रति हे० की दर से 10-20 किग्रा० बारीक बालू में मिलाकर बुवाई/रोपाई से पूर्व उर्वरकों की तरह से बुरकाव करना लाभप्रद होता है। उक्त बायो पेस्टीसाइड्स की 2.50 किग्रा० मात्रा को प्रति हे० 100 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर लगभग 5 दिन रखने के उपरान्त बुवाई से पूर्व भूमि में मिलाया जा सकता है।

भूमि जनित रोगों के नियंत्रण हेतु :

भूमि जनित रोगों के नियंत्रण हेतु बायोपेस्टीसाइड (जैव कवक नाशी) ट्रीइकोडरमा बिरडी 1 प्रतिशत अथवा ट्राइकोडरमा हारजिएनम 2 प्रतिशत की 2.5 किग्रा० प्रति हे० 60-75 किग्रा० सड़ी हुए गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुवाई के पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से शीथ ब्लाइट, मिथ कण्डुआ आदि रोगों के प्रबन्धन में सहायक होता है

 

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

error: Content is protected !!