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कोविड काल में खोजे गये 150 कुष्ठ रोगी

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रिपोर्ट: अंकित श्रीवास्तव

समाचार पत्रिका, गोरखपुर

• निःशुल्क कराया जा रहा है उपचार

• लक्षण दिखने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील

कोविड की लड़ाई के बीच जिला कुष्ठ रोग कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में 150 नये कुष्ठ रोगियों को ढूंढने में कामयाबी पायी है। इनमें 70 मरीज पैसिव बेसिलाइन (पीबी) और 80 मरीज मल्टी बेसिलाइन (एमबी) के हैं। इन सभी को कार्यक्रम के तहत निःशुल्क उपचार दिया जा रहा है। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. गणेश प्रसाद यादव ने अपील की है कि जिन लोगों में भी कुष्ठ का लक्षण दिखे वह सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क अवश्य करें। कुष्ठ के जांच, परामर्श, इलाज व दवा की सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क है।

जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि कोविड काल के बीच दो बाल कुष्ठ रोगी मिले हैं जबकि कोई नया दिव्यांग कुष्ठ रोगी नहीं मिला है। नया कुष्ठ रोगी मिलने पर पहले दिन की दवा सामने खिलाई जाती है। इस पहली खुराक से ही 99 फीसदी बैक्टेरिया मर जाते हैं। कुष्ठ का पीबी मरीज छह महीने के इलाज के बाद, जबकि एमबी मरीज एक साल में ठीक हो जाता है। जिन स्थानों पर बाल कुष्ठ रोगी और दिव्यांग कुष्ठ रोगी मिलते हैं उनको हॉटस्पॉट मानते हुए वहां फोकस्ड लैप्रोसी कैंपेन (एफएलसी) चलाया जाता है और पूरे गांव की जांच की जाती है। बीआरडी मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल, सभी सीएचसी और पीएचसी पर कार्यक्रम के कर्मचारी तैनात हैं जो मरीज का पंजीकरण कर दवा उपलब्ध करवाते हैं। लालकोठी स्थित जिला कुष्ठ रोग कार्यालय पर भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।

जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता डॉ. भोला गुप्ता ने बताया कि कुष्ठ रोगियों को खोजने का प्रशिक्षण भी आशा कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। हाल ही में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पिपरौली, गोला और कैंपियरगंज सीएचसी, जबकि डेरवा पीएचसी की करीब 500 आशा कार्यकर्ताओं को इस संबंध में प्रशिक्षित किया जा चुका है। वर्ष 1982 से पहले कुष्ठ रोगी को जीवन भर दवा खानी पड़ती थी जबकि एमडीटी पद्धति के आने के बाद छह महीने से एक साल तक की दवा से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है, बशर्ते की वह स्थायी दिव्यांगता में न बदल गया हो।

कुष्ठ रोग को जानिए

• शरीर में कोई ऐसा दाग-धब्बा जो सुन्न रहता है वह कुष्ठ रोग हो सकता है।
• यह रोग लैपरी नामक माइक्रो बैक्टेरिया से होता है जो बहुत धीमी गति से इंफेक्शन करता है।
• अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इलाज हो सकता है।
• यह हेल्दी कान्टैक्ट से नहीं फैलता है। इसका इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे में तभी होता है जबकि वह 16-18 घंटा प्रतिदिन कई महीनों तक रोगी के क्लोज कान्टैक्ट में रहे।

जिले में कुष्ठ रोग कार्यक्रम का हाल 

• 201 कुष्ठ रोगियों को वित्तीय वर्ष 2020-2021 में बीमारी से मुक्ति मिल गयी। इनमें 85 पीबी और 116 एमबी मरीज थे।
• जिले में कुष्ट के कुल 431 दिव्यांग रोगी हैं जिनमें से 204 को प्रति माह 2500 रुपये की पेंशन दी जाती है।

डब्ल्यूएचओ कर रहा है सहयोग

डॉ. सुधाकर पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि जिले में कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत रोगियों को ढूंढ कर उन्हें इससे मुक्त कराया जा रहा है। इस कार्य में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तकनीकी सहयोग दे रहा है। लोगों को चाहिए कि अगर उनके आसपास ऐसा कोई रोगी है तो उसकी मदद करें। उसे छूने मात्र से कुष्ठ नहीं फैलता है। सामुदायिक सहयोग से इस बीमारी का उन्मूलन होगा।

 

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