किराने की दुकानें खोलने पर चली लाठियां लाॅक डाउन का भी हुआ जमकर उल्लंघन – समाचार पत्रिका

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किराने की दुकानें खोलने पर चली लाठियां लाॅक डाउन का भी हुआ जमकर उल्लंघन

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नीरज तिवारी, लखनऊ

समाचार पत्रिका, ब्यूरो

राजधानी में गुरुवार को लाॅकडाउन को लेकर दुविधा की स्थिति बनी रही। एक तरफ निशातगंज, जापलिंग रोड, फतेहगंज सहित कई अन्य जगहों पर किराने की भी दुकान सरकार के आदेशानुसार खुली रही तों पानदरीबा, चारबाग सहित अन्य कुछ क्षेत्रों में किराने की दुकानें खोलने पर लाठियां खानी पड़ी।

बताते चलें कि कल सरकार की ओर से जानकारी दी गई थी कि किराने की दुकानें खुलेगी। आज जब दुकानें खोली गयी तों पानदरीबा और चारबाग में पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। जबकि अन्य क्षेत्रों में दुकानें खुली रही।इसके अलावा पुराने लखनऊ से जनता के द्वारा लॉकडाउन के उल्लंघन जमकर किया जा रहा है। पुराने लखनऊ के अनेक गली मोहल्ले और सड़कों पर भले ही दुकाने पूरी तरह से बंद है लेकिन सब्जी के ठेले आवश्यक वस्तुओं की दुकानें सरकारी गाइडलाइन के अनुसार खुली हुई हैं लेकिन सड़कों पर भीड़ इस तरह दिख रही है कि मानो लॉकडाउन सिर्फ बाजार बंद करने के लिए लागू किया गया हो। लॉकडाउन के उल्लंघन की चिंताजनक तस्वीरें वैसे तो नये लखनऊ में भी देखने को मिली लेकिन पुराने लखनऊ के मुकाबले नये लखनऊ में वो हालात नहीं है।

पुराने लखनऊ का चौक ठाकुरगंज नक्खास सहादतगंज बाजार खाला हैदरगंज अमीनाबाद पारा आदि तमाम क्षेत्रों में लोग अब बिना रोक-टोक अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। यहां तक की ई-रिक्शा भी सड़कों पर सवारियां बैठाकर फर्राटे भरने लगे हैं हालांकि गुरुवार को पुराने लखनऊ की सड़कों पर पुलिस सक्रिय नजर आई और सड़क से गुजर रहे लोगों को रोक कर घर से बाहर निकलने का कारण पूछा गया। कुछ लोगों को तो पुलिस ने बैरंग वापस लौटा दिया जबकि कुछ लोगों को इसलिए छोड़ा गया क्योंकि उन्होंने घर से बाहर निकलने की जो मजबूरी बताई वह मजबूरी वास्तविक थी । उत्तर प्रदेश की जनता को यह सोचना चाहिए कि सरकार को लॉकडाउन लगाने से कोई लाभ नहीं है बल्कि लाभ अगर किसी को है तो वो जनता को है। इसके अलावा लॉक डाउन के दौरान कुछ लोगों के द्वारा सामान को महंगा करने की खबरें भी लगातार मिलती रही।

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