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कोरोना कॉल: लॉकडाउन की कड़वी हकीकत और मजदूरों की बेबसी सुन खड़े हो जा रहे रोंगटे, घर वापसी के लिए जद्दोजहद जारी

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विक्रम प्रताप सिंह, ब्यूरो

समाचार पत्रिका, सहजनवां

देश में कोरोना संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। जिसकी वजह से तमाम राज्यों में लॉकडाउन लग गया है या फिर कोरोना से बचाव के लिए बहुत कड़े नियम अपनाए जा रहे हैं। बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए जद्दोजहद जारी है। इसे सड़कों पर उमड़े मजदूरों के हुजूम से समझा जा सकता है। मुसीबत में घर पहुंचने के लिए मजदूर हताश-निराश साइकिल या फिर पैदल ही अब घरों की ओर निकल रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते घर लौटने के लिए वे किराये का इंतजाम भी नहीं कर पा रहे हैं।
बताते चलेें कि देहरादून में बेलदार का काम करने वाले नसीम जो की बिहार के अररिया के निवासी हैं। लॉकडाउन के डर और काम ना मिलने से अपने घर वापस आने के लिए मजबूर हो गए। इसी प्रकार उत्तराखंड में पल्लेदारी का काम करने वाले मोहम्मद रासीद जो मूल रूप से बिहार के बेसिट के रहने वाले हैं कोरोना के दूसरे लहर में काम छीन जाने के बाद अब घर वापसी के लिए मजबूर हो गए और इनके जैसे बहुत से ऐसे प्रवासी मजदूर हैंं जो कोरोना की वजह से काम ना मिलने के कारण अब अपने अपने घर को वापस आ रहे हैं। इनसे बात करने पर पता चला की ये रात्रि 1 बजे से ही निकले हैं, गाड़ी न मिलने पर इन्होंने 50 किमी का सफर पैदल ही तय किया। फिर जब बस मिला तो मनमाने तरीके से किराया मांगा और मजबूरी में इन्हें मूल किराए से तीन गुना दाम देके सफर करना पड़ा। यात्रियों ने बताया की सरकार और प्रशासन के तरफ से ना तो कोई इनकी सुधि लेने वाला है और ना ही कोई सहायता किसी से मिल रही। बिना मास्क के सैकड़ों लोग भीड़ में घर वापसी के लिए परेशान हैंं। जिसकी वजह से कोरोना का खतरा और बढ़ते जा रहा है।

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