छठवीं शक्ति मां कात्यायनी का घरों में सजा दरबार, सोशल मीडिया पर मन्दिरों की पूजा के दर्शन – समाचार पत्रिका

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छठवीं शक्ति मां कात्यायनी का घरों में सजा दरबार, सोशल मीडिया पर मन्दिरों की पूजा के दर्शन

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नीरज तिवारी, लखनऊ

समाचार पत्रिका, ब्यूरो
मां दुर्गा की छठवीं शक्ति मां कात्यायनी की उपासना का दौर  के रविवार को घरों में दिनभर चलता रहा। मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर कमेटी की ओर से कोविड वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुये मंदिर को बन्द रखा गया। जबकि मन्दिर के पुजारियों ने सप्तशती पाठ विधि विधान के साथ जारी रखा और सुबह व शाम आरती हुई, जिसे सोशल मीडिया पर चलाया गया।

इसी क्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित सभी छोटे-बड़े मां भगवती के मंदिरों में दिन भर भक्तों ने माथा टेका। चंद्रिका देवी मंदिर और बीकेटी स्थित इक्यावन शाक्ति पीठ मन्दिर बन्द रहा, लेकिन मन्दिरों में होने वाली पूजा का सोशल मीडिया पर सजीव प्रसारण किया गया। बताते चलें कि नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। कहा जाता है कि कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना किया। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलायी। इनका गुण शोधकार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी।

कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी पूजा

यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। इसी लिए ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है।इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं।

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