गोरखपुर: झिझक टूटी तो डॉक्टरनी बन गई दर्जनों महिलाएं – समाचार पत्रिका

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गोरखपुर: झिझक टूटी तो डॉक्टरनी बन गई दर्जनों महिलाएं

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♦अब खुद की बनाई दवाओं के सेवन से ठीक हो सकेंगी बीमार महिलाएं
♦महिला समाख्या इकाई के सदस्य गांव की महिलाओं को कर रहे हैं प्रशिक्षित

परमात्मा राम त्रिपाठी
यौन रोगों से पीड़ित गांव की गंवार समझी जाने वाली जो महिलाएं अब-तक शर्म के चलते किसी डॉक्टर से अपनी समस्या तक नहीं बता पाती थीं, वह अब खुद के साथ गांव की अन्य महिलाओं का इलाज करेंगी। झिझक तोड़कर यह महिलाएं इलाज की जानकारियां बटोरने लगी हैं। आयुर्वेदिक दवाएं बना रही हैं और बाकायदा इलाज के लिए प्रशिक्षण भी ले रही हैं।

यह संभव हुआ है महिला समाख्या इकाई की एक पहल से। संस्था इन महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही है। क्रियान्वयन इकाई के सदस्य अब गांवों-गांवों में घूमकर महिलाओं को जोड़ रहे हैं। सदस्य बनाने के बाद महिलाओं को आयुर्वेदिक दवाएं बनाने के तौर-तरीके बताए जा रहे हैं। जानकारियां बटोरकर महिलाएं स्वयं यौन रोगों से छुटकारा पा रही हैं। खुद के साथ ही दूसरी महिलाओं का भी इलाज करने को तैयार हो रही हैं। इकाई के सदस्य ब्लाक से लगायत गांव स्तर पर महिला संजीवनी केन्द्र खुलवाकर महिलाओं को विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों के पौधे लगाने को प्रेरित कर रहे हैं। इन्हीं जड़ी-बूटियों से महिलाएं आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करेंगी और इलाज के साथ ही इसे कमाई का भी जरिया बना सकती हैं।

इन बीमारियों का करेंगी इलाज
बवासीर, भगन्दर, ल्यूकोरिया, अनियमित माहवारी, कमर व पेड़ू का दर्द, अकस्मात गर्भपात आदि गम्भीर बीमारियों का महिलाएं स्वयं इलाज कर सकेंगी।

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